अभी हँसो न मेरी जान राव ज़िंदा है

Nasir Rao

रचनाकार- Nasir Rao

विधा- गज़ल/गीतिका

जो घाव तुुम्ने दिया था वो घाव ज़िंदा है
अभी हँसो न मेरी जान राव ज़िंदा है

तुम्हारी दिल से वही खेलने की आदत है
हमारा अपना वही रख रखाव ज़िंदा है

अभी ना सोच मेरी हार तेरी जीत हुई
अभी तो खेल में अंतिम पडाव ज़िंदा है

डरे डरे हुऐ सहमे हुऐ अंधेरे हैं
चिराग़ बुझ तो रहा है दबाव ज़िंदा है

हमे यक़ीन है 'नासिर' नहीं भटक सकते
अभी ग़ज़ल से हमारा लगाव ज़िंदा है

– नासिर राव

Views 45
इस पेज का लिंक-
Recommended
Author
Nasir Rao
Posts 27
Total Views 468

इस पर अपनी प्रतिक्रिया देंं


हिंदी साहित्यपीडिया का फेसबुक ग्रुप ज्वाइन करें और जुड़ें दुनिया भर के साहित्यकारों एवं पाठकों से- facebook.com/groups/hindi.sahityapedia
5 comments
  1. जो घाव तुुम्ने दिया था वो घाव ज़िंदा है
    अभी हँसो न मेरी जान राव ज़िंदा है

    तुम्हारी दिल से वही खेलने की आदत है
    हमारा अपना वही रख रखाव ज़िंदा है

    जिंदा शायरी …

    नज़ीर नज़र