अभी चेहरे पर हिजाब रहने दो

Bhupendra Rawat

रचनाकार- Bhupendra Rawat

विधा- गज़ल/गीतिका

अभी चेहरे पर हिजाब रहने दो
उसे बंद किताब रहने दो

सवाल है ढेरों किताब में
सवाल अभी राज़ रहने दो

चांद तारों से भरी रात बाकी है
बोतल में बंद शराब रहने दो

मुक्कमल नही हुई गुफ्तगू
बाकी अभी रात रहने दो

टूट गए हो जब सपने सारे
आँखों में वो ख्वाब रहने दो

तिश्र्गी जब तक बूझे नही
आब की तलाश रहने दो

मंजिल दूर ही सही मिलेगी जरूर
हार कर भी शेष अभी प्रयास रहने दो

आज है ज़िन्दगी जी लो हर पल
असफार में अज़ाब की रात रहने दो

शुष्क है मरुस्थल यहाँ कब से
मरुस्थल में अभी बरसात रहने दो

बेसुध है खुमार में ग़ालिब उनके
हाथ में जाम का गिलास रहने दो

जल रहा है आग में उनकी आज तक
भूपेंद्र को होता यूँ ही ख़ाक रहने दो

भूपेंद्र रावत
6/09/2017

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Bhupendra Rawat
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M.a, B.ed शौकीन- लिखना, पढ़ना हर्फ़ों से खेलने की आदत हो गयी है पन्नो को जज़बातों की स्याही से रँगने की अब बगावत हो गईं है ।

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