अभिनेता आजकल का

Rita Yadav

रचनाकार- Rita Yadav

विधा- कविता

अभिनेता आजकल का हर शख्स हो गयाl l
खालिस दिलों का अब इस जहां में खो गया ll

मिलते हैं गले हम हमारे दिल नहीं मिलते l
झूठी है मुस्कान हमारे होठ नहीं हिलते ll

मिलना जुलना भी अब फ़क़त शिष्टाचार हो गया l
व्यवहार भी अब तो यहां लाचार हो गया ll

तहजीब चल रही थी पुरखार राहों पर l
चलते चलते अब इसका भी दम निकल गया ll

दृष्टि हया मर गई अब तो मर गई आत्मा l
विनती रीता की सुन पुतले में जान दे परमात्मा ll

रीता यादव

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