अब तो राशन कार्ड बनाना….

Dinesh Sharma

रचनाकार- Dinesh Sharma

विधा- कविता

कैसे है ये जनता के सेवक
जो जनता पर राज करते है
पहले करते जनता की चाकरी
बाद चक्कर कटवाते है,
जीत का जश्न बना कर
जाने कहाँ छिप जाते है
कुछ है जो करते है सेवा
बाकी मेवा खा जाते है,
भ्रष्टाचार की मारम मार
चारो तरफ है हाहाकार
कही चरित्रवान तो,
कही
चरित्र का अकाल है,
बक बक करने से मतलब
बोल बड़े विकराल है
बिगड़ गयी चाल है,
अब तो राशन कार्ड बनवाना
हो गयी टेड़ी चाल है,
जाने किस सफेदपोश में छिपा
"संदीप" लाल है।।

******D-S******

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Dinesh Sharma
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सब रस लेखनी*** जब मन चाहा कुछ लिख देते है, रह जाती है कमियाँ नजरअंदाज करना प्यारे दोस्तों। ऍम कॉम , व्यापार, निवास गंगा के चरणों मे हरिद्वार।।

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