अब चलूंगी मैं..

मोनिका भाम्भू कलाना

रचनाकार- मोनिका भाम्भू कलाना

विधा- कविता

तुम मिलों न मिलों
अब चलूंगी मैं…
तुम हो न हो
अब जियुंगी मैं
तुम मेरे रहो न रहो
अब न रुकूँगी मैं…|
अब मुझे चलना ही होगा
अब मुझे बढ़ना ही होगा
कदम थके ही सही,
रास्ता कोई नया चुनना ही होगा |
तुम मिल भी गए अगर
तो मिलना न रहा
काबू रख जज्बातों को
अपने अरमानों को कुचलना ही होगा |
तुम थे तो एक सहारा था
दूर ही सही कोई किनारा था
अब जब ज़िन्दगी दामन छोड़कर
निकल ही गई है
हर पल मौत से गुजरना होगा l
जिसके लिए मर गई हूँ
उसी के लिए मुझे जीना होगा
अब मुझे चलना ही होगा..|

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मोनिका भाम्भू कलाना
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कभी फुरसत मिले तो पढ़ लेना मुझे, भारी अन्तर्विरोधों के साथ दृढ़ मानसिकता की पहचान हूँ मैं..॥

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