अब चलूंगी मैं..

मोनिका भाम्भू कलाना

रचनाकार- मोनिका भाम्भू कलाना

विधा- कविता

तुम मिलों न मिलों
अब चलूंगी मैं…
तुम हो न हो
अब जियुंगी मैं
तुम मेरे रहो न रहो
अब न रुकूँगी मैं…|
अब मुझे चलना ही होगा
अब मुझे बढ़ना ही होगा
कदम थके ही सही,
रास्ता कोई नया चुनना ही होगा |
तुम मिल भी गए अगर
तो मिलना न रहा
काबू रख जज्बातों को
अपने अरमानों को कुचलना ही होगा |
तुम थे तो एक सहारा था
दूर ही सही कोई किनारा था
अब जब ज़िन्दगी दामन छोड़कर
निकल ही गई है
हर पल मौत से गुजरना होगा l
जिसके लिए मर गई हूँ
उसी के लिए मुझे जीना होगा
अब मुझे चलना ही होगा..|

Views 307
इस पेज का लिंक-
Recommended
Author
मोनिका भाम्भू कलाना
Posts 5
Total Views 564
कभी फुरसत मिले तो पढ़ लेना मुझे, भारी अन्तर्विरोधों के साथ दृढ़ मानसिकता की पहचान हूँ मैं..॥

इस पर अपनी प्रतिक्रिया देंं


हिंदी साहित्यपीडिया का फेसबुक ग्रुप ज्वाइन करें और जुड़ें दुनिया भर के साहित्यकारों एवं पाठकों से- facebook.com/groups/hindi.sahityapedia