अफ़सोस

dr. pratibha prakash

रचनाकार- dr. pratibha prakash

विधा- कविता

अफ़सोस जताने ये मन निकला
क्यों ज्ञान में खोखलापन निकला
हम करते रहे श्रेष्ठ सिद्ध स्वयं को
मन से न अहम का घुन निकला
परिवार बिना माने अबला
ये कैसा नया उसूल निकला
जो साथ रहे बनकर सहयोगी
उन पर फिर ये रोष ही निकला
नहीं स्वीकार किया नवसुमन को
ये मधुवन क्यों पतझड़ निकला
अनुभव फीका क्यों पड़ जाता
जब अंकुर कोई नया निकला
अभी देर बहूत है समझाने में
वास्तव समझा क्या क्या निकला
आओ कारें फिर मन्थन चिंतन
बोया आम तो क्यों बबूल निकला
आग्रह है मानसिकता बदलो
तिमिर मिटा नव मार्ग निकला
हे श्री मदन कृपा कर दो
आ पाये हमे मिलजुल चलना
आहत बहुत मैं दृष्टिकोण से
क्यों स्त्री को इतना तुच्छ समझा
हे विवेक शील विद्जन जानो
यहीं सृष्टि का उदभव निकला

क्षमा सहित
🙏🙏🙏🙏🙏🙏

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dr. pratibha prakash
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Dr.pratibha d/ sri vedprakash D.o.b.8june 1977,aliganj,etah,u.p. M.A.geo.Socio. Ph.d. geography.पिता से काव्य रूचि विरासत में प्राप्त हुई ,बाद में हिन्दी प्रेम संस्कृति से लगाव समाजिक विकृतियों आधुनिक अंधानुकरण ने साहित्य की और प्रेरित किया ।उस सर्वोच्च शक्ति जसे ईश्वर अल्लाह वाहेगुरु गॉड कहा गया है की कृपा से आध्यात्मिक शिक्षा के प्रशिक्षण केंद्र में प्राप्त ज्ञान सत्य और स्वयं को आपके समक्ष प्रस्तुत कर रही हूँ।

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2 comments
  1. स्त्री तब तक अबला ही रहेगी जब तक बेफिजूल का अबलापन का प्रचार करती रहेगी।
    क्योंकि आज की तारीख में स्त्री पुरुष से काफी आगे निकल चुकी है । सभी अधिकार उसी के पास हैं । बस उसे थोडा रोने की आदत विरासत में मिली है ।
    जब वह रोना धोना छोड़ कर इसी बात को बार बार हाईलाइट करना बन्द कर देगी । तब स्त्री पुरुष का अंतर काफी कम हो जायेगा । कायर स्त्री में से किसी दलेर स्त्री ने क्या कभी लिखने की कोशिश की आज की लड़की हुस्न और नंगेपन का कितना दुरूपयोग कर रही है । अपने ससुराल वालों की जिंदगी का मजाक बना रही है , अपने सपनो की होड़ में अपने बच्चों की जिंदगी का मजाक बना रही है । सभी पुरुष रचनाकार भी स्त्री टॉपिक को ही ज्यादा चुनते है क्योंकि उन्हें यही वाहवाही का स्त्रोत मिलता है ।
    दैविक गुणों से भरपूर स्त्री का कर्ज न चुका पाऊँ
    परन्तु बिगड़ी औरत से अपनी परछाई की भी सगी होने की उम्मीद नही ।
    सभी बहनों से अनुरोध है अपने अबलापन के रोने को रोने में से कुछ समय निकालकर उन बिगड़ी बहनो को जागृत करने के लिए कुछ रचनाएँ करें।
    आपका सच्चा राष्ट्र भाई
    कृष्ण मलिक

  2. सत्य विशाल है भाव उसके कई रूप है सबकी पृथक व्याख्या है हमें उसके सभी पक्षों पर ध्यान देना चाहिए