अपने आप को जानो खुद को खुद से पहचानो

bharat gehlot

रचनाकार- bharat gehlot

विधा- कविता

अपने आप को जानो खुद को खुद से पहचानो,
क्‍या थे क्‍या हो गये उस पर एक नजर डालो,
पुराणो की परिभाषा वेदो को पहचानो ,
नही मिला कुछ भी अतीत के घोर पतन से मनुज ,
गगन के घोर तिमिर से मन के अधियार को पहचानो,
वेदो को तुम जानो पुराणो को तुम मानो,
करो अनुसरण राम का सस्‍कति को तुम पहचानो ,
भ्रात़त्‍व भरत सा जानो सेवक हनुमान सा मानो ,
विवेकानन्‍द सी बुध्दि, सुभाष जैसी है शक्ति ,
मंगल पाण्‍डे का साहस उधम सिंह सी हिम्‍मत को तुम अपने में पहचानों ,
लाला की लाठी गाॅधी की खादी,
अदम्‍ब साहस लक्ष्‍मी का अदभुद मीरा की भक्ति ,
शिवा की शान को देखो, राणा की आन को देखो,
टीपू की धार को देखो, तुलसी की तान को देखो ,
हमारे हदय में बस रहे उस भगवान को देखो ,
हम्‍मीर की हठ को देखो मालदेव की मूछो के ताव को देखो ,
अपने अाप को जानो खुद को खुद से पहचानो ,
भरत गेहलाेत
जालोर राजस्‍थान
सम्‍पर्क सुत्र -7742016184

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