” अपनी अपनी पोथी , अपना अपना भाष ” !!

Bhagwati prasad Vyas

रचनाकार- Bhagwati prasad Vyas " neerad "

विधा- कविता

कम, पढ़े -लिखे गुणी हैं ज्यादा ,
पढ़े -लिखों ने सब कुछ नापा /
संतों की महिमा है न्यारी ,
अलख जगाया , दुनिया वारी /
जहाँ भूख कम होगी –
ज्यादा है उपवास //

अब, बहू-बेटे में प्यार पले है ,
वृद्धाश्रम खूब, फले फूले हैं /
बेटे नहीं , बेटियां प्यारी ,
महके आँगन , घर , फुलवारी /
है नई चेतना जागी –
परिणामों की आस //

यहाँ ,राजनीति के दांव नये हैं ,
कभी जीते कभी छले गए हैं /
शकुनि के पांसे चलते हैं ,
सत्ताधारी हमें छलते हैं /
अंधियारे जब जब सिमटे –
फैल गया प्रकाश //

सपनों, का खेल लगे न्यारा है ,
हाथ हमारे इकतारा है /
खोना – पाना अब खेल यहाँ ,
किस्मत ले जाये जाने कहाँ /
पतझड़ जब बीत चले –
तब आयेंगे मधुमास //

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Bhagwati prasad Vyas
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एम काम एल एल बी! स्वतंत्र लेखन ! आकाशवाणी इंदौर से कविताओं एवं कहानियों का प्रसारण ! सरिता , मुक्ता , कादम्बिनी आदि पत्रिकाओं में रचनाओं का प्रकाशन ! कवि सम्मेलनों में रचना पाठ ! भारत के प्रतिभाशाली रचनाकार , प्रेम काव्य सागर , काव्य अमृत आदि साझा काव्य संग्रहों में रचनाओं का प्रकाशन ! एक लम्हा जिन्दगी , रूह की आवाज , खनक आखर की एवं कश्ती में चाँद आदि साझा काव्य संग्रह शीघ्र प्रकाश्य !
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