अपना विचार

पं. विश्वनाथ मिश्र स्नेही जी (वत्स) गणितकवि

रचनाकार- पं. विश्वनाथ मिश्र स्नेही जी (वत्स) गणितकवि

विधा- अन्य

जिस तरह सूर्य का तेज सब पर समान
आपका आशीष सब पर समान
ऋण मुक्त किसान भय मुक्त इंसान
किन्तु पढ़े लिखे नौजवान
खेती रहित हैं है छोटी सी दूकान
बेरोजगार परेशान
इनपर भी देवें ध्यान
इनपर भी है कर्ज स्वरोजगार
सौ पचास ही है दैनिक आय
कभी कभी वर्षा बाजार बंद होय जाय
राशन लेना पड्ता मोल
पढाई -शुल्क दवाई कपडे
चौबीसों घण्टे परेशान

विजय दसमी पर आपका आशीर्वाद
आखिर ये भी तो हैं आपकी प्रजा संतान
इनको भी उपहार
ऋण मुक्त हो छोटा सा रोजगार

आप हैं दयालु स्वयं समझदार

चुनावी वादा तो हो गया पूर्ण
विजय दसमी पर उपहार
आशीर्वाद का चूर्ण

ये देख रहे चातक की भांति
इनके लिए आप बने स्वाति

चुनावी वादा पूर्ण धन्यवाद
परेशान रोजगारियों को भी चाहिए
विजय श्री का आशीर्वाद

सदा रहेगा सबको याद

जय माँ गड़्गे जय गो धाम ।
जय नन्दीश्वर जय श्री राम ।।

गो धाम है मथुरा हैं नन्दीश्वर काशी
श्री राम जी अवध के वासी। ।

तीनों स्थानों को है प्रणाम

आप के विचारों को नमन

—-पं0विश्वनाथ मिश्र गणित-विज्ञान-कवि

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