अनुशासन

साहेबलाल 'सरल'

रचनाकार- साहेबलाल 'सरल'

विधा- गीत

अनुशासन के साथ में जीवन जीना बहुत जरूरी है .
तिनका तिनका मिल घर बनता होती आशा पूरी है .

चलते जाना कदम पड़ेंगे राह बनेगी अपने आप .
धीरे चलना न थकना तुम धीरे धीरे जपना जाप .
कदम में दम है नापेगा वो चाहे लम्बी दूरी है .
अनुशासन के साथ में जीवन जीना बहुत जरूरी है .

हार रहे हो बार बार हजार बार कोशिश करना .
हार के आगे जीत लिखी है सूत्र मित्र ये रट लेना .
हार करो स्वीकार नहीं जग बोले जो मगरूरी है .
अनुशासन के साथ में जीवन जीना बहुत जरूरी है .

सतत परिश्रम करके देखो सिर ऊँचा हो जायेगा .
श्रम के बल पर ही तो प्यारे मंजिल अपनी पायेगा .
भारी भट्टी में तपकर बनती रोटी तंदूरी है .
अनुशासन के साथ में जीवन जीना बहुत जरूरी है .

हम तो अपनी धुन के पक्के चाहे कोई कुछ बोले .
यही सही है होता भी है मतवाले का तन डोले .
कठिन काम को करने को खुद को देना मंजूरी है .
अनुशासन के साथ में जीवन जीना बहुत जरूरी है .

जीवन एवन है न भूलो भूल भुलैया में तुम आज .
वरना वन वन में भटकोगे मंजिल जबकि तेरे पास .
यहीं कहीं पर छिपी हुई जो मृग तेरी कस्तूरी है .
अनुशासन के साथ में जीवन जीना बहुत जरूरी है .

गुमनामी के शहर में रहते लिये करोड़ी लाख करोड़ .
ऐसा भी क्या पैसा है जो लगा रहे हैं लोग दौड़ .
बापूजी के संयम को न कहना कि मजबूरी है .
अनुशासन के साथ में जीवन जीना बहुत जरूरी है .

-कवि साहेबलाल 'सरल'

Views 61
इस पेज का लिंक-
Recommended
Author
साहेबलाल 'सरल'
Posts 54
Total Views 1.9k
संक्षेप परिचय *अभिव्यक्ति भावों की" कविता संग्रह का प्रकाशन सन 2011 *'रानी अवंती बाई की वीरगाथा' की आडियो का विभिन्न मंचो में प्रयोग। *'शौचालय बनवा लो' गीत की ऑडियो रिकार्डिंग बेहद चर्चित। *अनेको रचनाएं देश की नामचीन पत्र पत्रिकाओं में प्रकाशित। *छंद विधान के कवि के रूप में देश के विभिन्न अखिल भारतीय मंचो पर स्थान। *संपर्क नम्बर-8989800500, 7000432167

इस पर अपनी प्रतिक्रिया देंं


हिंदी साहित्यपीडिया का फेसबुक ग्रुप ज्वाइन करें और जुड़ें दुनिया भर के साहित्यकारों एवं पाठकों से- facebook.com/groups/hindi.sahityapedia