अधिकार

Sandhya Chaturvedi

रचनाकार- Sandhya Chaturvedi

विधा- कविता

बात करते हो जब अधिकार की,
दिया किस ने है अधिकार नारी को।

किया छलनी उस के आत्म-सम्मान को,
किया हनन हमेशा ही उस के अधिकार को।

बात करो जब नेताओ की,बिना लिए ही
ले लिए उन लोगो ने सारे अधिकार जनता के।

छीन लिया देश का सुकून और चैन सारा
कर दिया पतीत और हिन् सा जनता को

बात करो अब सैनिकों की भी तो जरा,
मिला है अधिकार गोली खाने का ही,

शहीद हो देश पर,मिलेगा सम्मान मरणोपरांत
मिलेगे फिर नमन में सलामी भी तोपो की।

जीती ते जी तो नही अधिकार ,किसी को
सच की राह पर ले जाये,दे पलटवार

सबक सच्चा सीखलाये, ताकि जो
भटक गये पथ से उन को पथ पर ले आये।।

नमन संध्या उन वीरो को जिनको नही
मिलता कोई सम्मान,क्या उन के प्राण

की कीमत कम है,उच्चस्तर के सैनिकों से
घर उन के भी रोटी तो छिनती है,

माँ उस की भी सौ सौ आँसू रोती है,
अर्धनगिनी उस की भी सुहाग खोती है।।

संध्या चतुर्वेदी
मथुरा यूपी

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Sandhya Chaturvedi
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नाम -संध्या चतुर्वेदी शिक्षा -बी ए (साहित्यक हिंदी,सामान्य अंग्रेजी,मनोविज्ञान,सामाजिक विज्ञान ) निवासी -मथुरा यूपी शोक -कविता ,गजल,संस्मरण, मुक्तक,हाइकु विधा और लेख लिखना,नृत्य ,घूमना परिवार के साथ और नए लोगो से सीखने का अनुभव। व्यवसाय-ग्रहणी,पालिसी सहायक,कविता लेखन

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