अदभुत है बिटिया

Jitendra Dixit

रचनाकार- Jitendra Dixit

विधा- कविता

दिनभर की थकान एक पल मैं हटा देती है,
दौड़ कर अपना लॉलीपॉप मुझे चटा देती है।
जिंदगी रोज जो मुझे मुश्किलों मैं फसा देती है,
उदासी मै भी मेरी बेटी गुदगुदा के हँसा देती है।
अपनी शरारतों से कभी कभी माँ की रुला देती है,
उसकी माँ भी गले लगा उसे गुस्से को भुला देती है ।
जब अपनी ऊंचाई से ऊँची रखी चीजों को उठाने की,
करती है कोशिश उसकी ये आदत हमें हौसला देती है।
हम दोनों मैं हो जाती है जब कभी कभी अनबन,
बिटिया बीच मैं बैठ दोनो की दूरियों को पटा देती है।
मैं उदास हु तो वो उदासी को एक पल मैं हटा देती है,
दौड़ कर अपना लॉलीपॉप मुझे चटा देती है।
रचनाकार: जितेंन्द्र दीक्षित,
पड़ाव मंदिर साईंखेड़ा।

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Jitendra Dixit
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कविता मेरे लिये एक रिश्ता हैं जो मेरे और आप के दरमियाँ हैं। अपना दर्द अपनी खुशी अपनी आवाज आप तक पहुचाने के लिए लिखता हूं।

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