अति सुन्दरतम् ऋतु सावन

लक्ष्मी सिंह

रचनाकार- लक्ष्मी सिंह

विधा- कविता

🌹💕🌹🌹💕🌹
🌹अति सुन्दरतम् ऋतु सावन की आई बहार ।
सूर्य से तपती धरती को था, जिसका इन्तजार ।।

प्रतिपल परिवर्तित नूतन साज श्रृगार ।
🌹नव किशलय का हरित विहार ।

🌹सुन्दर अलंकृत, सजीव मनोरम,
प्रकृति को मिला सौन्दर्य उपहार ।

🌹 धानी चुनरिया पहने धरती,
अंबर को मिला इन्द्रधनुष का सतरंगी हार ।

🌹 चहुँ ओर प्रकृति का अह्लाद,
मस्त मगन हो नाच उठा संसार।

🌹 उमड़ – घुमड़ घन अम्बर छाया,
सीतल – मंद बहे पूरवैया, ठंढी परत फुहार ।

🌹हंस पुकारे, तीतर गाये, कोयल कूँके,
करे पपीहा पीऊँ – पीऊँ की पुकार ।

🌹झिंगुर बोले, मेढ़क की टर्-टर्,
कीट-पतंगा,भवरों की मीठी गुंजार ।

🌹बादल गरजे, बिजली चमके,
नभ से बरसत मुसला धार।

🌹चाँद छुपता, कभी निकलता,
जुगनू रात में टिम-टिम करता,
रह-रह बरसती वह ऐसी रसधार।

🌹छत, छज्जा, पीपल पत्तों पर
जल-तरंगों की बजती झनकार।

🌹सावन आया संग-संग लाया
कितने सारे पर्व-त्योहार।

🌹जन्माष्टमी, श्रावणी-खीर, हरियाली तीज,
आई रक्षा-बंधन , भाई-बहन का प्यार ।

🌹काँवर लेकर चले कवड़िया
अमरनाथ सावन के शुभ सोमवार।

🌹रूनझून-रूनझून काँवर बाजे,
गूँजे बोल बम, बम की जयकार ।

🌹पायल बाजे, नाचे मोर,
नाचे वृज की नारी,
कोई गावत गीत मल्हार ।

🌹मेंहदी रचाती, मंगल गाती,
करे सुहागन, प्रीत की मनुहार ।

🌹प्रेम-अग्नि से तपती, असिंचित,
हृदय को मिलती शीतबयार ।

🌹घर – घर झूला, झूले गोपियाँ,
झूला पड़े कदम्ब की डार ।

🌹राधा के संग श्री कृष्णा झूले,
मंद-मंद बहे यमुना की धार ।

🌹अति सुन्दरतम् ऋतु सावन की आई बहार ।
सूर्य से तपती धरती को था जिसका इन्तजार ।।
🌹💕लक्ष्मी सिंह 💕🌹

Sponsored
Views 126
इस पेज का लिंक-
Recommended
Author
लक्ष्मी सिंह
Posts 255
Total Views 159.3k
MA B Ed (sanskrit) My published book is 'ehsason ka samundar' from 24by7 and is a available on major sites like Flipkart, Amazon,24by7 publishing site. Please visit my blog lakshmisingh.blogspot.com( Darpan) This is my collection of poems and stories. Thank you for your support.

इस पर अपनी प्रतिक्रिया देंं


हिंदी साहित्यपीडिया का फेसबुक ग्रुप ज्वाइन करें और जुड़ें दुनिया भर के साहित्यकारों एवं पाठकों से- facebook.com/groups/hindi.sahityapedia