अति पीडा की छाप

RAMESH SHARMA

रचनाकार- RAMESH SHARMA

विधा- दोहे

उसके चेहरे पर दिखी, अति पीड़ा की छाप !
मारा जिसको भूख ने ,मरा नहीं जो आप !!

ऐसे रस्म रिवाज पर, क्यों न लगे प्रतिबंध !
जो फैलाते हैं सदा , जीवन में दुर्गन्ध!!

बेटी है अनमोल धन,.कुदरत का उपहार !
जिसको मिलना चाहिए, जीने का अधिकार

तुलसी पीपल नीम सब कुदरत का उपहार !
होता ढेरों रोग का, इनसे ही उपचार !!
रमेश शर्मा.

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RAMESH SHARMA
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अपने जीवन काल में, करो काम ये नेक ! जन्मदिवस पर स्वयं के,वृक्ष लगाओ एक !! रमेश शर्मा

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