बेटी की पुकार——– बेटी ना मारो

Dr Meenaxi Kaushik

रचनाकार- Dr Meenaxi Kaushik

विधा- गीत

फर्क नहीं बेटा बेटी में…..हो ssssss
समझो मां के प्यारों।
ना बेटी मारो,. ना बेटी मारो ll
भगवान की इस नैमत पे ,क्यूं चलता जोर तुम्हारा
बनते पाप के भागी बिल्कुल भी नही विचारा
ममता की मूरत है बेटी सच्चाई स्वीकारो
ना बेटी मारो,. ना बेटी मारो ll

धन दौलत बेटें बांटें ,और सुख दुख बेटी बांटे
निस्वार्थ सी इस दुनिया में ,वो सारा जीवन काटे
क्या देंगें कलियुग के बेटे ssss….
कुछ तो समझ विचारो
ना बेटी मारो,. ना बेटी मारो ll

मां का ही रूप है बेटी ,जो इसको मरवाओगे
फिर किस मुहं से जाकर के ,मां से बेटा पाओगे
करके कन्यादान हो नरसी sssss…..
अपना जन्म सुधारो
ना बेटी मारो,. ना बेटी मारो ll

पढ़ लिखकर जब ये बेटी, छू लेगी अम्बर को
बदलेगी ये दुनियां ,बदलेगी मंजर को
बदलो तुम भी सोच को अपनी sssss……,
इसका जन्म संवारो
ना बेटी मारो,. ना बेटी मारो ll
(डा मीनाक्षी कौशिक)

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Dr Meenaxi Kaushik
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मांगा नही खुदा से ज्यादा बस इतना चाहती हूँ, करके कर्म कुछ अच्छे सबके दिलों मे रहना चाहती हूँl ईश वन्दना जन सेवा कर जीवन बिताना चाहती हूँ, हर पल हर चेहरे पर मुस्कुराहट लाना चाहती हूँ ||

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