अगर तुम साथ चल दो तो सफ़र आसान हो जाये

Mahesh Kumar Kuldeep

रचनाकार- Mahesh Kumar Kuldeep "Mahi"

विधा- गज़ल/गीतिका

अगर तुम साथ चल दो तो सफ़र आसान हो जाये
तुम्हे पाकर के हम सबसे बड़े धनवान हो जाये

वज़ाअत और सीरत में तेरी जादूगरी ऐसी
तुम्हे जो देख ले शैतान भी इन्सान हो जाये

ये दर्दे-दिल हमेशा के लिए मिट जाएगा हमदम
अता जो इक दफ़ा हमको तेरी मुस्कान हो जाये

ज़रा सी हुस्न की दौलत हमारे नाम भी कर दे
ये दौलत जो मिले हमको तो हम सुलतान हो जाये

न बदले तुम न बदले हम न बदले ये सफ़र 'माही'
हमारा तुम तुम्हारा हम चलो ईमान बन जाये

माही

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Mahesh Kumar Kuldeep
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प्रकाशन साहित्यिक गतिविधियाँ एवं सम्मान – अनेकानेक पत्र-पत्रिकाओं में आपकी गज़ल, कवितायें आदि का प्रकाशन | प्रकाशित साहित्य - गुलदस्त ए ग़ज़ल (साझा काव्य-संग्रह), काव्य सुगंध भाग-3(साझा काव्य-संग्रह),कलाम को सलाम (साझा काव्य-संग्रह), प्रेम काव्य सागर (साझा काव्य-संग्रह), अनुकृति प्रकाशन, बरेली त्रैमासिक पत्रिका ‘अनुगुंजन’में सतत प्रकाशन |पहला गजल-संग्रह ‘कागज़ पर जिंदगी’ प्रकाशाधीन |
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6 comments
  1. वाह! माहीभाई जी, खूव सूरत गजल के लिए दिली दाद कुबूल करें।

  2. आदरणीय कुलदीप जी अच्छी गजल है. किन्तु अंत के दोनों ही अशआर गड़बड़ा गए हैं. देख लें
    ज़रा सी हुस्न की दौलत हमारे नाम भी कर दे
    ये दौलत जो मिले हमको तो हम सुलतान हो जाये/ जाएँ

    न बदले तुम न बदले हम न बदले ये सफ़र ‘माही’
    हमारा तुम तुम्हारा हम चलो ईमान बन जाये……….बन जाए / हो जाए ?

    • जी अशोक जी ! आपने गौर किया और गलतियों की ओर ध्यान दिलाया , इसके लिए आपका धन्यवाद | मैं इन्हें दूर करता हूँ |