अगर उम्मीद है आसार बाकी है…

govind sharma

रचनाकार- govind sharma

विधा- गज़ल/गीतिका

जमी से आसमा का सार बाकी है,
अगर उम्मीद है आसार बाकी है।।
मुहब्बत की कहानी है यही मेरी,
लबो से हूर का इजहार बाकी है।
गरीबी ने कहा फरियाद मुझको,
कहा जीवन में ये इतवार बाकी है।
नही सुनता फलक देखो दुआ मेरी,
हवा का लग रहा,इसरार बाकी है।।
हमारे इश्क़ की परवाज में देखो,
वफाओ की नजर एतबार बाकी है।।
गोविन्द शर्मा,

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