अगरचे मैला साधू संत का किरदार हो जाये—- गज़ल

निर्मला कपिला

रचनाकार- निर्मला कपिला

विधा- गज़ल/गीतिका

अगरचे मैला साधू संत का किरदार हो जाये
तो मजहब धर्म सब उसके लिये व्यापार हो जाए

लडाई हक की जो लडता रहा ताउम्र दुनिया मे
वो आने वाली नस्लों के लिये अन्वार हो जाये

रहो न बेखबर इन शहद सी गुफ्तार वालों से—
जुबाने ए शीर भी मुमकिन है कि तलवार हो जाये

न जाएगा कभी कूए मलामत जहन लोगों का
सिहाकारी का गर्चे रास्ता हमवार हो जाये—-

मजाल इतनी है दुश्मन की चला जाये वो करके वार
ये मुमकिन है तभी जब राजदां गद्दार हो जाये

अनाथों और'गरीबों की ‌मदद कर क्या‌ पता‌ निर्मल
शजर ये नेकिओं का हश्र मे फलदार हो जाये

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निर्मला कपिला
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लेखन विधायें- कहानी, कविता, गज़ल, नज़्म हाईकु दोहा, लघुकथा आदि | प्रकाशन- कहानी संग्रह [वीरबहुटी], [प्रेम सेतु], काव्य संग्रह [सुबह से पहले ], शब्द माधुरी मे प्रकाशन, हाईकु संग्रह- चंदनमन मे प्रकाशित हाईकु, प्रेम सन्देश मे 5 कवितायें | प्रसारण रेडिओ विविध भरती जालन्धर से कहानी- अनन्त आकाश का प्रसारण | ब्लाग- www.veerbahuti.blogspot.in

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