*** अंधेरे बहुत है ***

भूरचन्द जयपाल

रचनाकार- भूरचन्द जयपाल

विधा- गीत

अंधेरे बहुत है तन्हाइयों के

कह दो तो हम शमां लेके आये

कहकर तो देखो शमां दिल की जलाये

जगा देंगे हम तो अरमां दिल में सोये

जली जो ये शमां मिटाने अंधेरा

कहीं खुद ही ना बुझ जाये

तुम ना रूठो तुम ना रोना

यदि फ़ख्र है मेरी वफ़ा पे

प्यासा है दरिया ये हमने है जाना

खुद डूबने की ख़ातिर बेताब दिल है

मय क्या पिलाये मदहोश हो तुम

आँखों में है आबाद मयखाना तेरे

कहते हो अनजान जहां से तुम हो

ये कैसे यूं ही अब हम मान जायें

अंधेरे बहुत है तन्हाइयों के

कह दो तो हम शमां लेके आये

कहते हो उड़ाने पतंग प्यार की तुम

कभी सोचा है पतंग कट ना जाये

मिलेंगे तो सब समझा देंगे तुमको ।।

👍मधुप बैरागी

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भूरचन्द जयपाल
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मैं भूरचन्द जयपाल सेवानिवृत - प्रधानाचार्य राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, कानासर जिला -बीकानेर (राजस्थान) अपने उपनाम - मधुप बैरागी के नाम से विभिन्न विधाओं में स्वरुचि अनुसार लेखन करता हूं, जैसे - गीत,कविता ,ग़ज़ल,मुक्तक ,भजन,आलेख,स्वच्छन्द या छंदमुक्त रचना आदि में विशेष रूचि, हिंदी, राजस्थानी एवं उर्दू मिश्रित हिन्दी तथा अन्य भाषा के शब्द संयोग से सृजित हिंदी रचनाएं 9928752150

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