अंधेरे जोड़ के

Sonika Mishra

रचनाकार- Sonika Mishra

विधा- मुक्तक

मुक्तक :-
तुम गये क्यूं छोड़ के !
कसमे वादे तोड़ के !
जी रहे हैं हम अकेले !
बिखरे मोती जोड़ के !!

देखते है जब मुख मोड़ के !
मुस्कान होठो पे ओड के !
जी रहे हैं आज हम !
ये अंधेरे जोड़ के !!
– सोनिका मिश्रा

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Sonika Mishra
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मेरे शब्द एक प्रहार हैं, न कोई जीत न कोई हार हैं | डूब गए तो सागर है, तैर लिया तो इतिहास हैं ||

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