~~ अंधी और बदनाम गलीआं ~~

अजीत कुमार तलवार

रचनाकार- अजीत कुमार तलवार "करूणाकर"

विधा- कविता

कुछ तो वजह होगी,
जो उस ने जिस्म बेच दिया अपना
उस के दिल से पूछो कभी
की क्या क्या नहीं खो दिया अपना !!

बड़ी कडवाहट लेकर
वो खुद को धकेल चुकी है
उस बदनाम गली में
अपना मन भी बेच चुकी है !!

वकत के हाथो वो
बेहद लाचार जो हुई है
सपनो को मन में दबा कर
घर से भी वो बेघर हुई है !!

पर आज उस काम को
न जाने कितनी कर रही हैं
वो तो जिस्म बेच रही
खुद के मन को हार कर
पर तुम तो अपने शौंक की
खातिर हद से गुजर रही हो !!

अजीत कुमार तलवार
मेरठ

Sponsored
Views 67
इस पेज का लिंक-
Recommended
Author
अजीत कुमार तलवार
Posts 420
Total Views 6.3k
शिक्षा : एम्.ए (राजनीति शास्त्र), दवा कंपनी में एकाउंट्स मेनेजर, पूर्वज : अमृतसर से है, और वर्तमान में मेरठ से हूँ, कविता, शायरी, गायन, चित्रकारी की रूचि है , EMAIL : talwarajit3@gmail.com, talwarajeet19620302@gmail.com. Whatsapp and Contact Number ::: 7599235906

इस पर अपनी प्रतिक्रिया देंं


हिंदी साहित्यपीडिया का फेसबुक ग्रुप ज्वाइन करें और जुड़ें दुनिया भर के साहित्यकारों एवं पाठकों से- facebook.com/groups/hindi.sahityapedia