अंग दान

Beena Lalas

रचनाकार- Beena Lalas

विधा- कविता

सुन ऐ मेरे अभिन्न अंग,लिया था जन्म मेंने तुमको भी साथ लेकर संग ,
सुन ऐ मेरे अभिन अंग,किया था पोषित तुमको भी माँ ने
किया था पल्लवित तुमको भी पिता ने,एक दूजे के संग संग,सुन ऐ मेरे अभिन अंग
दी थी माँ ने अमूल्य शिक्षा,देखा मुझ में अपना प्रतिरूप
करवाया था पाठ याद एकलव्य का,समर्पण व त्याग के महत्व का
किया समर्पित अभिन अंग गुरु दक्षिणा में
किंचित भी ना घबराया ना सकुचाया था,
कितना भाग्यशाली था वो अंग रख दिया उसे चरण पादुका संग ।।
सुन ऐ मेरे अभिन अंग ,तू भी रह मेरे पिया के संग
अब तक थी में उनकी जीवन साथी
तेरे कारण बन पाई में उनके नव जीवन की में नव दात्री
पिया ने जीती जंग जीवन की
पिया ने जीती जंग जीवन की
रक्षा की तुमने मेरे सतीत्व की
रक्षा की तुमने मेरे सतीत्व की
सुन ऐ मेरे अभिन अंग (kidine )…सुन ऐ मेरे अभिन अंग

सारांश…एक पत्नी अपने पति को अंग दान(kidney)करके स्वयम को कितना भाग्यशाली समझती हे…इस विषय पर मेंने ये कविता लिखी हॆ ये विश्व की पहली कविता हॆ जो गुर्दे पर लिखी गई हे ॥

Views 71
Sponsored
Author
Beena Lalas
Posts 6
Total Views 2.3k
पति का नाम --खेम सिंह लालस शिक्षा --हिंदी स्नातकोत्तर MA भूतपूर्व आल इंडिया रेडियो एडवाइजर कमेटी मेंबर ईवेंट मेनेजर कविताये और हास्य व्यंग्य लिखती हूँ
इस पेज का लिंक-

इस पर अपनी प्रतिक्रिया देंं


Sponsored
Related Posts
हिंदी साहित्यपीडिया का फेसबुक ग्रुप ज्वाइन करें और जुड़ें दुनिया भर के साहित्यकारों एवं पाठकों से- facebook.com/groups/hindi.sahityapedia
One comment