अंगार वीर ने उगले है

Kavi DrPatel

रचनाकार- Kavi DrPatel

विधा- मुक्तक

अंगार वीर ने उगले है , कुछ ऐसा तुम श्रृंगार करो ।
रण में जो घाव मिले मुझको , चुम्बन से तुम उपचार करो ।
जाना जल्दी फिर समरभूमि , सजनी उत्साह भरो अंदर ,
रोम रोम की पीड़ा हर लो , मुझ पर इतना उपकार करो ।

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Kavi DrPatel
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मैं कवि डॉ. वीर पटेल नगर पंचायत ऊगू जनपद उन्नाव (उ.प्र.) स्वतन्त्र लेखन हिंदी कविता ,गीत , दोहे , छंद, मुक्तक ,गजल , द्वारा सामाजिक व ऐतिहासिक भावपूर्ण सृजन से समाज में जन जागरण करना

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