Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
24 Feb 2017 · 1 min read

कलम

कलम ही मेरी जान हैं,
कलम ही मेरा जहाॅ है,
कलम ही मेरी पुजा हैै,
कलम ही मेरा ध्‍यान है,
कलम ही मेरी अवनि है,
कलम ही मेरा आसमा है,
कलम ही मेरी आन है,
कलम ही मेरी शान,
कलम से ही मेरा परिचय,
कलम से ही मेरी पहचान,
कलम ही मेरी आत्‍मा,
कलम ही मेरी देह ,
कलम ही है परमात्‍मा,
कलम ही है आधार,
कलम ही मेरा अभिमान है,
कलम ही मेरा स्‍वाभिमान,
कलम ही मेरा मन्दिर हैं,
कलम ही मेरी मस्‍जिद है,
कलम ही मेरा शिवालय है,
कलम मेरी लिए हिमशिखर के समान,
कलम ही मेरी सदभावना
कलम ही मेरा सौह्रार्द है ा

भरत कुमार गेहलोत
जालोर (राजस्‍थान)
सम्‍पर्क सुत्र – 7742016184

Language: Hindi
802 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
You may also like:
"वक्त की औकात"
Ekta chitrangini
3105.*पूर्णिका*
3105.*पूर्णिका*
Dr.Khedu Bharti
* खूबसूरत इस धरा को *
* खूबसूरत इस धरा को *
surenderpal vaidya
चन्द्रयान 3
चन्द्रयान 3
Jatashankar Prajapati
अगर नाम करने का वादा है ठाना,
अगर नाम करने का वादा है ठाना,
Satish Srijan
बच्चे पैदा कीजिए, घर-घर दस या बीस ( हास्य कुंडलिया)
बच्चे पैदा कीजिए, घर-घर दस या बीस ( हास्य कुंडलिया)
Ravi Prakash
भिखारी का बैंक
भिखारी का बैंक
Punam Pande
*......कब तक..... **
*......कब तक..... **
Naushaba Suriya
ग़ज़ल
ग़ज़ल
प्रीतम श्रावस्तवी
ना जाने कौन से मैं खाने की शराब थी
ना जाने कौन से मैं खाने की शराब थी
कवि दीपक बवेजा
स्वर्ण दलों से पुष्प की,
स्वर्ण दलों से पुष्प की,
sushil sarna
मैं तो महज आग हूँ
मैं तो महज आग हूँ
VINOD CHAUHAN
वरदान
वरदान
पंकज कुमार कर्ण
अल्फाज़ ए ताज भाग-11
अल्फाज़ ए ताज भाग-11
Taj Mohammad
जो भूल गये हैं
जो भूल गये हैं
Dr. Rajendra Singh 'Rahi'
जब 'बुद्ध' कोई नहीं बनता।
जब 'बुद्ध' कोई नहीं बनता।
Buddha Prakash
"तहजीब"
Dr. Kishan tandon kranti
आलस्य एक ऐसी सर्द हवा जो व्यक्ति के जीवन को कुछ पल के लिए रा
आलस्य एक ऐसी सर्द हवा जो व्यक्ति के जीवन को कुछ पल के लिए रा
Rj Anand Prajapati
"संवाद "
DrLakshman Jha Parimal
■ आज की बात
■ आज की बात
*Author प्रणय प्रभात*
*मासूम पर दया*
*मासूम पर दया*
सुरेन्द्र शर्मा 'शिव'
बलबीर
बलबीर
विनोद वर्मा ‘दुर्गेश’
मेरी चाहत
मेरी चाहत
umesh mehra
दीप ज्योति जलती है जग उजियारा करती है
दीप ज्योति जलती है जग उजियारा करती है
Umender kumar
पिता है तो लगता परिवार है
पिता है तो लगता परिवार है
Ram Krishan Rastogi
ख़ुद के होते हुए भी
ख़ुद के होते हुए भी
Dr fauzia Naseem shad
आज के युग में नारीवाद
आज के युग में नारीवाद
Surinder blackpen
उदारता
उदारता
RAKESH RAKESH
मुक्तक
मुक्तक
डॉक्टर रागिनी
तेवरीः तेवरी है, ग़ज़ल नहीं +रमेशराज
तेवरीः तेवरी है, ग़ज़ल नहीं +रमेशराज
कवि रमेशराज
Loading...